दो दिन का है ये प्राण पंछी
कर ले तुझको जो भी है करना
कल हम सबको यहाँ से है जाना
दुखों के पहाड़ खड़े है राह में
जूझते रहना सफलता आएगी हाथ में
इस कठिन राह पर तुझको है चलना
कोई न जान सकेगा तेरे दिल के दर्द को
फैला देना तेरी खुशबू और हर्ष को
गम पी के तुझे सब कुछ है सहना
जाने न जाने ये दुनिया तुझे
तू तो एक हस्ती है तेरे मन् की
खुदको ही हंसकर इस हस्ती को है निखारना
ये है जीवन का सच
जो मैंने तुझसे मिलकर है जाना

7 Comments:

Dhiraj Shah said...

जहाँ चाह् वहा राह है
यह भी जीवन का सच है

ओम आर्य said...

sahee hai yah bhi jiwan ka sach hai .......bahut sundar

दिगम्बर नासवा said...

सच कहा जो भी करना है जल्दी कर लेना चाहिए........... कल किसने देखा है

रंजना said...

Bilkul sahi....Bhavpoorn abhivyakti.

M VERMA said...

जीवन का फलसफा कहती आपकी कविता अच्छी ही नहीं बहुत अच्छी है. मुझे तो इस पोस्ट में दो-दो कविता नज़र आ रही है. एक शब्दों में कही गई है दूसरी खूबसूरत चित्र के माध्यम से.

Dr.Kumar Vishvas said...

आभार आप के इस स्नेह के लिए ....

Mukesh said...

very nice....