अब किसी दैरो-हरम की बात मत कर
किसी से रहमो-करम की बात मत कर
प्यार कर उससे जो दिल का मोम हो
संगमरमर के सनम की बात मत कर
उलझने ही उलझने हैं ज़िन्दगी में
जुल्फ के अब पेंचो-ख़म की बात मत कर
रक्स करती है जहाँ आय्याशियाँ
उस सियासत के हरम की बात मत कर
जिबाह तो पेशा है उसका यूँ
कस्साब से रहमो करम की बात मत कर

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रोये वो इस कदर मेरी लाश से लिपटकर,
अगर इस बात का पता होता,
तो कब के मर गए होते....

3 Comments:

दिगम्बर नासवा said...

रोये वो इस कदर मेरी लाश से लिपटकर,
अगर इस बात का पता होता,
तो कब के मर गए होते...

बहुत ही लाजवाब.......... दिल को छलका दिया इन लाइनों ने

शारदा अरोरा said...

बहुत बढ़िया , रहमो करम की बात मत कर , सब न न कह कर भी उसी सनम की बातें ,
ये क्या है कि
मर के भी उसकी यादों से लिपटने की बातें

अर्चना गंगवार said...

wah ...wah ..
kya baat hai