मोहब्बत में आज़माइश नही की जाती
इसे निभाने की फरमाइश नही की जाती
प्यार में आते हैं कदम कदम पे सख्त मुकाम
दिल के ज़ख्मों की तो नुमाइश नही की जाती।
हिज्र में जो मिलने लगे वसल का लुत्फ़
तो फ़िर मिलने की ख्वाहिश नही की जाती
अगर न मिलना ही हो वक्त का तकाज़ा
तो फ़िर मिलने की जिद नही की जाती
खुशनसीबी से जो मिल बैठे दो दिल
तो ज़माने में उसकी जैबेइश नही की जाती
जिन को हो मिलना और वो मिल न पाएं
दिल से कभी भी वो हसरत-ओ-यास नही जाती
प्यार तो हैं मुक़द्दरों का खेल
जो न मिल सके प्यार तो गुजारिश नही की जाती।

6 Comments:

vandana said...

har lafz shandar.........dil ko choo gayi rachna....sach pyar aisa hi hota hai.
ismein na to aajmaish hoti hai aur na hi gujarish,na farmasish hoti hai na khwahish.sirf pyar hi pyar hota hai........koi aas nhi hoti,koi pyas nhi hoti.

दिगम्बर नासवा said...

प्यार में आते हैं कदम कदम पे सख्त मुकाम
दिल के ज़ख्मों की तो नुमाइश नही की जाती।

लाजवाब सोच है आपकी............सचमुच प्यार में aisaa ही hotaa है..............अच्छा लिखा

दिगम्बर नासवा said...

प्यार में आते हैं कदम कदम पे सख्त मुकाम
दिल के ज़ख्मों की तो नुमाइश नही की जाती।

लाजवाब सोच है आपकी............सचमुच प्यार में aisaa ही hotaa है..............अच्छा लिखा

श्यामल सुमन said...

प्यार में आते हैं कदम कदम पे सख्त मुकाम
दिल के ज़ख्मों की तो नुमाइश नही की जाती।

खूबसूरत पंक्तियाँ। वाह।

हर बार अपना दर्द बताना नहीं अच्छा।
और जख्म हैं ऐसे कि छुपाना नहीं अच्छा।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

महामंत्री - तस्लीम said...

रूमानी जज्बातों से लबरेज खूबसूरत गजल।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

रंजना said...

Bahut hi bhavpoorn aur sundar abhivyakti...Waah !!