आए तेरे द्वारे पे हम झोलियाँ पसार के
रखियो हमारी लाज ये ही हम पुकारते
आए तेरे द्वारे पे ...........
जीवन की डोर बहुत कमजोर है
टूट न जाए राह में तूफां का ज़ोर है
दे दो सहारा मेरे पापों को भुला के
रखियो हमारी लाज ..........
परम हितकारी सदा सुखकारी
दाता मेरा है पूर्ण भंडारी
आए हम दर पर झोलियाँ फैला के
रखियो हमारी लाज ........
तेरे बिना दाता मेरा कोई न जहाँ में
अपना बना कर मुझे करदो एहसान ये
करे फरियाद आनंद दीदार दे
रखियो हमारी लाज....
तर्ज़- चुप चुप खड़े हो जरूर कोई बात है

1 Comments:

Dhiraj Shah said...

दाता तेरो अनेको रुप

रखियो हमारी लाज
वो सबकी लाज रखता है

एक अच्छी रचना.....