कोई कमजोरी सी लगती है, ज़िन्दगी के हर मोड़ पर कुछ कमी सी लगती है,


पता नही कहाँ ले जायेगी मेरी राह मुझे,


एक तेरे सिवाह हर मंजिल अजनबी सी लगती है।

आरजू तो है मेरी तुझे हर पल देखती रहूँ ऐ दोस्त,


पर अब हर तम्मान्ना मेरी अधूरी सी लगती है।

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कोई ज़ज्बातों से खिलवाड़ करता है तो कोई दिल तोड़ देता है
और कोई होता है जो हमेशा वफ़ा करके बेवफाई झेलता है
कितने प्यार से और तहजीब से बनाया होगा इस धरती को खुदरत ने
लेकिन यहाँ तो इन्सान अपने मतलब के लिए उस खुदा के नाम से भी खेलता है...

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अपना सब कुछ लुटा दिया हम ने,


अपनी नादानी के कारनामो में,


अब बचा नही कुछ भी सिवाय दर्द के,


ज़िन्दगी के बचे हुए लम्हों में,


खो दी है हमने वो सारी खुशिया,


जो हमें मिलसकती थी आज की ज़िन्दगी में,


अब इसका शिकवा कर के क्या फायदा,


मैंने ख़ुद ही तो डुबोया है अपने आप को ग़मों के समंदर में।


साभार- अनजान

4 Comments:

श्यामल सुमन said...

जिन्दगी तो बस मुहब्बत और मुहब्बत जिन्दगी
सिवाह कर दें सिवा ये बात मुझे जरूरी सी लगती है

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

ओम आर्य said...

shayad mohababt adhuri hi hoti hai.....sundar rachana

मनोज गौतम said...

sundar aur khoobsurt rachna. badhai.

दिगम्बर नासवा said...

अब इसका शिकवा कर के क्या फायदा,
मैंने ख़ुद ही तो डुबोया है अपने आप को ग़मों के समंदर में।

खूबसूरत शेरों से लदी............. लाजवाब रचनाएं लिखी हैं आपने............. सच मच इंसान खुद अपनी राह चुनता है....... फिर किसी से क्या शिकवा