यादें जब दिल में नहीं रूह में बस जाती हैं,
बादलों कि तरह आँखे भी बरस जाती हैं !
वो अगर तुम से खफा हैं तो खफा मत समझो,
लड़कियां प्यार में लड़कों पे बरस जाती हैं !

रोज मुझको तेरे आने की खबर मिलती हैं,
रोज मुझको मेरी तन्हाइयां डस जाती हैं !
तनहा रहता हूँ तो बीमार नज़र आता हूँ,
साथ रहते हैं तो बाछें मेरी खिल जाती हैं !

हुस्नवालों का भरोषा नहीं कीजिये साहब,
दिन बदलते हैं तो नज़रें भी बदल जाती हैं!

वो हमें चाहें न चाहें, ये और बात हैं,

मेरी चाहत तो आंखों से साफ़ झलक जाती हैं।


1 Comments:

Palak said...

हुस्नवालों का भरोषा नहीं कीजिये साहब,
दिन बदलते हैं तो नज़रें भी बदल जाती हैं!
वो हमें चाहें न चाहें, ये और बात हैं,
मेरी चाहत तो आंखों से साफ़ झलक जाती हैं।
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bahut khub ravi ji ......

akhay to mahobbat ka aaina hoti hai janab
bharosa na kijiye un husna walon ka per wo ainaa to sabhi ka ek hi hota hai.......