आँख से आँख मिला, बात बनाता क्यूँ है।
तू अगर मुझसे खफा है तो छुपाता क्यूँ है।
गैर लगता है, न अपनों की तरह मिलता है,
तू ज़माने की तरह मुझको सताता क्यूँ है।


वक्त के साथ हालात बदल जाते है।
यह हकीकत है मगर मुझको सुनाता क्यूँ है।
एक मुद्दत से जहाँ काफिले गुज़रे ही नही,
ऐसी राहों पे चिरागों को जलाता क्यूँ है।


1 Comments:

Palak said...

wo jo hum se nafrat kartay hai ....
hum to aaj bhi sirf un per martay hai ...
nafrat hai to kya hua yaroo..
kuch to hao jo sirf wo hum se kartay hai......