ज़िन्दगी थी अजीब सब के सब एक ख्वाब थे,
जो खुशी नही मिली उसके गम बेहिसाब थे।
था समंदर अपना फिर भी क्यो प्यासे थे,
हमारी एक ही बात मे छुपे की हिजाब थे।

1 Comments:

Palak said...

one more shayri for this blog...

kya arman sajaye the hamne aur kya hogaya
jiske liye aaye the jaha me usne hi rula diya
thamna tha hath jinka umrabhar
vo hat to unhone khavabo me hi chhuda liya