राजधानी दिल्ली में कुल 4 स्थानों पर हुए सिलसिलेवार बम विस्फोटों में 25 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए. पहले बंगलौर, अहमदाबाद, सूरत और अब दिल्ली । और आगे हो सकता है की उनका अगला निशाना वाराणसी या कोई और शहर हो। ऐसी खबरें अब धीरे-धीरे आम बात होती जा रही हैं। जिस तरह एक के बाद एक आतंकवादी देश की किसी भी कोने में बम बिस्फोट कर रहे हैं। ऐसा लगता है की वर्तमान सरकार में आतंकवाद से लड़ने की शत प्रतिशत इच्छा शक्ति का आभाव है। सुरक्षा एजेंसियां भी वक्त रहते उन्हें रोकने में सफल नही हो पा रही हैं। अब तक दिल्ली में ४ जगहों पर बिस्फोट हो चुके हैं और कई बिस्फोटक बरामद किए जा चुके हैं। अभी पता नही कितने ऐसे पड़े होंगे जो अभी तक खोजे नही जा सके होंगे। पुलिस के बम निरोधक दस्ते ने अब तक कई बमों को निष्क्रिय कर दिया है। इन बमों के मिलने से यह साबित हो जाता है कि आतंकियों ने इस बार दिल्ली को अपना निशाना बनाया था।

अगर इस परेप्रेक्ष्य में पड़ोसी देश की बात करे तो भारत में चल रही आतंकवादी गतिविधियों का काफ़ी गहरा सम्बन्ध पाकिस्तान से है। एक तरफ़ पकिस्तान के प्रधान मंत्री और राष्ट्रपति भारत में हुए बम कंडों की निंदा करते हैं और आतंकवाद की लड़ाई में भारत का साथ और मदद चाहते हैं। क्या केवल इसलिए की कोई कही पाकिस्तान की ओर अंगुली न उठा दे? क्योकि ऐसा अक्सर होता रहा है… या फ़िर वाकई पाकिस्तान की मूल भावना भारत और भारतीयों से दोस्ती करने की होती जा रही है. क्या अब वो भी इस बात को समझने लगे हैं की पड़ोसी के साथ कटुता और शत्रुता छोड़कर मैत्री भाव से और आपसी सहयोग से वास्तविक विकास सम्भव है? किंतु दूसरी तरफ़ उनकी सीमा से घुसपैठ की जो कार्रवाही की जाती है, क्या वह पकिस्तान सरकार की जानकारी में नही है? सीमा पार घुसपैठ भारत के लिए सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है। आख़िर पकिस्तान इस पर अंकुश लगाने के लिए कब ठोस कदम उठाएगा। भारत के शीर्ष नेता इसे कब तक हल कर पायेंगे? ...इसी तरह के अनगिनत सवाल मेरे मन में आज उठ रहे हैं। और शायद ...........भारत की आम जनता के मन में भी उठते होंगे। ऐसे में एक आम आदमी क्या करे। उसका क्या कसूर है। हर जगह वो ही निशाना क्यो बनता है?
आतंकवाद और आतंकवादियों का सिवाय आतंक और दहशत फैलाने के अलावा और कोई धर्म नही होता। उन्हें किसी के विकास और समृद्धि से कोई लेना-देना नही है। आख़िर यह बात लोगों के समझ में कब आएगी?

आज-कल तेज़ी से बढ़ रही आतंकवादी गतिविधियों के देखकर ऐसा लगता है जैसे पूरे देश पर हमला हो रहा है। शायद अब वह समय आ गया है की जब केन्द्र सरकार को देश की आतंरिक सुरक्षा को लेकर कुछ ठोस कदम उठाने चाहिए। केन्द्र सरकार को चाहिए की वह सभी राज्यों के साथ मिलकर एक ऐसी अंतर्राज्यीय जांच एजेंसी का निर्माण करे जो हर तरह से परिपूर्ण हो। जो पूरे देश में एक समान रूप से लागू हो। भारत की सर्वोच्च जाच संस्था सी बी आई को अमेरिका की जाच संस्था ऍफ़ बी आई जैसी पावर और अधिकार मिलने चाहिए। ताकि वह किसी भी प्रकार के राजनैतिक दबाव में न आए और स्वतंत्र और निष्पक्ष जाच करे। भारत की पुलिस तंत्र को और मजबूत करने की बेहद ज़रूरत है। हर राज्य की पुलिस और केन्द्रीय खुफिया एजेंसियों में अच्छा और फास्ट तालमेल होना चाहिए। वैसे तो भारत ही नही पूरा विश्व आतंकवाद से जूझ रहा है, लेकिन चूँकि भारत सदा से शान्ति का पुजारी रहा है, और वो आगे भी विश्व समुदाय को शान्ति और अहिंसा का मार्ग दिखाता रहेगा। कुछ लोग इसे भारत की कमजोरी समझते हैं। पर हमारी सरकार को कुछ ऐसा करना चाहिए की विश्व समुदाय इसे भारत को अपनी कमजोरी के रूप न देखे। नही तो देश की स्थिति दिनों-दिन और भी बदतर होती जायेगी और आम जनता में भय और दहशत का माहौल व्याप्त हो जाएगा।

1 Comments:

Suresh Chandra Gupta said...

@ऐसा लगता है की वर्तमान सरकार में आतंकवाद से लड़ने की शत प्रतिशत इच्छा शक्ति का आभाव है।

ऐसा लगता नहीं है, यह सही है. यह सरकार वोटों के चक्कर में न जाने कितने और निर्दोष नागरिकों को मरवाएगी. इन हमलों में आम आदमी मरता है, इसलिए इन जन-देश-विरोधी नेताओं को कोई चिंता ही नहीं है. जिस दिन एक नेता मरेगा इन हमलों में तभी कुछ चोंकेंगे यह.