आंखों में आंसू
दिल में आहें
कांपती है रूह
सर्द है निगाहें
किसको जा के दर्द सुनाएँ
रुष्ट हुई सब अभिव्यन्ज्नाएं
रिश्तों के उपवन
सूखते जाएँ
फूल प्यार के
खिलने न पायें
कैसे जीवन को महकाएं
धूमिल हुईं सब अभिलाषाएं
मन की व्यथाएं
बढती ही जाएँ
पत्थर दिल लोग
पिघल न पायें
किसको अपना मीत बनायें
शुन्य हुईं सब संवेदनाएं

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