जो हमें है पसंद,
वो करते हैं पसंद किसी और को।
उन पर ही हमारी नज़र,
वो देखते हैं किसी और को ।
दिल लगाया ही था उनसे,
और टूट भी गया ।
हमें पता न चला,
क्यूं खुदा रूठ गया ।
अब सोच सोच कर ये बात,
दिल जलता रहता है ।
फिर भी उन्हीं को चाहने की खता,

न जाने क्यूँ ये दिल,

बार-बार करता रहता है

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दर्द काफी है बेखुदी के लिए,
मौत ज़रूरी है जिंदगी के लिए,
कौन मरता है यहाँ किसी के लिए,
किसी का कोई नही दोस्त सब कहानी है।

2 Comments:

दिगम्बर नासवा said...

दर्द काफी है बेखुदी के लिए,
मौत ज़रूरी है जिंदगी के लिए,
कौन मरता है यहाँ किसी के लिए,
किसी का कोई नही दोस्त सब कहानी है

किसी शाएर की ये बात याद आ गयी...........

कौन जीता है किसी और की खातिर ऐ दोस्त
सबको अपनी ही किसी बात पे रोना आया

vandana said...

jab insaan apna hi dost nhi to kisi aur se kaisi ummeed.......dost shabd aur dosti mein bada fark hota hai.

sach kaha..........kisi ka koi dost nhi.