शब्द कभी नही मरते,

कानों में देर तक गूँजते रहते हैं,

रुलाते कभी तो कभी हंसाते हैं,

प्रशंसा के दो शब्द गुदगुदाते हैं,

और जीवन में ऊर्जा भर देते हैं,

किंतु आलोचना के शब्द पत्थर सी चोट करते हैं,

और जीवन को निस्तेज कर देते हैं,

कहीं शब्द काँटों से गढ़ जाते हैं,

और दिल में घाव गहरा कर जाते हैं,

कहीं शब्द फूल से भी कोमल जो,

दर्द भी समेट लिया करते हैं,

विलीन हुए शब्दों की गहरी रेखा सी

मन में देर तक खिंची रहती है,

और बरसों पहले किसी की दी गाली,

रह रह कर उतेजित करती है,

वहीं अपने प्रिय के मधुर शब्दों की वाणी

कानों मैं मीठा सा रस घोल देती है,

और जीवन को तरंगित कर देती है.

3 Comments:

अर्चना गंगवार said...

bahut khoob shabd ka sansaar dikhaya hai....

kaun kaheta hai shabdo mein jaan nahi hoti .....
ye shabd hi tu hai jo kabhi jaan hi le lete hai aur kabhi jaan daal dete hai.....

Udan Tashtari said...

सत्य वचन!! शब्द कभी नहीं मरते. सुन्दर रचना.

vandana said...

shabdon ki bhasha anokhi hoti hai.........sahi kaha aapne shabd kabhi nhi marte, hamesha hamare aas paas hi hote hain kisi na kisi roop mein.