मेरे खवाबों में रंग उसने भरे,
फूल मेरे नाम के किताबों में उसने धरे।
दिल धड़कता है जब पहन कर वो हिजाब आए,
किया हो हशर मेरा जो कभी वो बे नकाब आए।

पी है शराब हर गली हर दूकान से,
एक दोस्ती सी हो गई है शराब के जाम से।
गुज़रे हैं हम कुछ ऐसे मुकाम से,
की नफरत सी हो गई है मोहब्बत के नाम से।


जिंदगी है नादाँ इसलिए चुप हूँ,
दर्द ही दर्द सुबह शाम इसलिए चुप हूँ।
कह दूँ ज़माने से दास्ताँ अपनी,
उसमे आएगा तेरा नाम इसलिए चुप हूँ।

अब लौट भी आओ तुम हमारी खातिर,
कि आपकी आस में ही हर शाम गुजार लिया करते है।
मायूसी जब छा जाती है चेहरे पे,
याद करके आपको, हम यूँ ही मुस्कुरा लिया करते है।

2 Comments:

Palak said...

ye jindgi bhi na jane kitnay mod deti hai,
har mod per naya sawal deti hai ..
dhoodhtay rahay jo hum jawab jindgi bhar ..
jawab mil jaye to wo sawal bdal leti hai....

Adams Kevin said...

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