गुज़र रहा था कल राह से मै
एक शख्स ने अचानक रोक दिया
जाने ऐसी क्या बात कही उसने
हैरत में मुझे डाल दिया


कौन था और क्या कह गया
शायद मुझको मुझसे मिलवा दिया
थे हज़ार मतलब उसकी बात के
ज़र्रा भर तो मुझे समझा दिया

है रफ़्तार ज़रूरी ज़िन्दगी में
अगर राह से जो नज़रे हटा दिया
टुकड़े टुकड़े कर देगी
एक ठोकर ने जो तुमको गिरा दिया

छोड़ा था जिसे दुनिया की भीड़ में
उसको भी मुझसे मिलवा दिया
मै तो ख्वाब संजोके बैठा था
हकीकत से मेरा सामना करा दिया

6 Comments:

niv said...

har ek ki life mai koi na koi shakhs aisa aata hai .aapki kavita se sabko apni life mai aaye insaan ki yaade taza ho jayegi .bahut hi sundar tarike se aapne bhav parkat kiye hai .........superb post really

शोभना चौरे said...

nivji ki bat se shmat hoo
मै तो ख्वाब संजोके बैठा था
हकीकत से मेरा सामना करा दिया

akdam steek bat .
abhar

'अदा' said...

मै तो ख्वाब संजोके बैठा था
हकीकत से मेरा सामना करा दिया
bahut khoob..

कैटरीना said...

Sach ke kareb lagi aapki kavita.
वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाएं, राष्ट्र को प्रगति पथ पर ले जाएं।

kavi kulwant said...

कौन था और क्या कह गया
शायद मुझको मुझसे मिलवा दिया
bahut khoob...

दिगम्बर नासवा said...

छोड़ा था जिसे दुनिया की भीड़ में
उसको भी मुझसे मिलवा दिया
मै तो ख्वाब संजोके बैठा था
हकीकत से मेरा सामना करा दिया

SACH MEIN APNE AAP SE MILNA BHI KITNA SUKHAD HOTA HAI .... BAHOOT AANAND LE RAHAA HUN RAVI JI APKI RACHNAON KAA....