नैनो मे बसे है ज़रा याद रखना,
अगर काम पड़े तो याद करना.
मुझे तो आदत है आपको याद करने की,
अगर हिचकी आए तो माफ़ करना.

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ये दुनिया वाले भी बड़े अजीब होते है,
कभी दूर तो कभी क़रीब होते है.
दर्द ना बताओ तो हमे कायर कहते है,
और दर्द बताओ तो हमे शायर कहते है.

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ख़ामोशियों की वो धीमी सी आवाज़ है,
तन्हाइयों मे वो एक गहरा राज़ है.
मिलते नही है सबको ऐसे दोस्त,
आप जो मिले हो हमे ख़ुद पे नाज़ है.

1 Comments:

अर्चना गंगवार said...

दर्द ना बताओ तो हमे कायर कहते है,
और दर्द बताओ तो हमे शायर कहते है.

---------------------wah bahut khoob
ekdam sahi baat sahi andaz mein kahi hai.......

ख़ामोशियों की वो धीमी सी आवाज़ है,
तन्हाइयों मे वो एक गहरा राज़ है.

bari shalinta se khamoshi ko suna hai aapne....
aur tanhai ko ager khamoshi se dekhe aur sune tu usme ek halki se raftaar bhi hoti hai....vo dheer se hamare man ke andhero mein ek diya sa jalati hai.....
bahut khoob