आज चीन की एक अदालत ने मिलावटी दूध मामले में दो लोगों को मौत की सज़ा सुनाई है. जबकि इस विवाद के केंद्र में रही सैनलू डेयरी की पूर्व प्रमुख को आजीवन कारावास भुगतना होगा. उत्तरी चीन में शिजियाज़ुआंग की एक अदालत ने इस मामले में कुल 21 लोगों को सज़ा सुनाई है. मिलावटी दूध के कारण छह बच्चों की मौत हो गई थी जबकि क़रीब तीन लाख बच्चे बीमार पड़ गए थे. आरोप था कि दूध पाउडर में मेलामाइन नामक रसायन मिलाया गया ताकि इसमें प्रोटीन की मात्रा ज़्यादा दिखाई जा सके. इस घटना के कारण चीन में काफ़ी हंगामा हुआ था. साथ ही देश-विदेश में चीन की छवि पर भी धब्बा लगा था. इस पूरे मामले में सैनलू ग्रुप की चेयरवूमैन तियान वेन्हुआ के ख़िलाफ़ फ़ैसले पर लोगों की निगाह थी. सैनलू ग्रुप बच्चों के दूध पाउडर बनाने वाला सबसे बड़ा ग्रुप है.

वेन्हुआ ने घटिया और नकली उत्पाद तैयार करने और उन्हें बेचने के मामले में अपना दोष स्वीकार कर लिया था. शिजियाज़ुआंग की अदालत ने वेन्हुआ को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई है जबकि ज़ांग युजुन और गेंग जिनपिंग को मौत की सज़ा सुनाई गई है. युजुन पर पूर्वी चीन के शांगडांग में एक ग़ैर क़ानूनी वर्कशॉप चलाने का आरोप था जिसमें 600 टन नकली प्रोटीन पाउडर तैयार किया जाता था. यह देश में मेलामाइन का सबसे बड़ा स्रोत था. युजुन के नकली प्रोटीन पाउडर को बेचने के आरोप में ज़ांग यान्ज़ांग को भी आजीवन कारावास की सज़ा मिली. दूसरी ओर जिनपिंग पर ये आरोप साबित हुआ कि उन्होंने ज़हरीली खाद्य सामग्री बनाई और इसे डेयरी कंपनियों को बेचा. जिनपिंग को मौत की सज़ा सुनाई गई. उनके सहयोगी गेंग जिन्ज़ू को आठ साल क़ैद की सज़ा मिली है.

पिछले कई सालों से भारत में भी दूध और अन्य खाद्य पदार्थों में मिलावट के मामले सामने आते रहे हैं। ऐसे मामलों की संख्या दिनों-दिन बढ़ते जाने का एक महत्वपूर्ण कारण यह भी है कि एक तो ग्राहक जल्दी शिकायत दर्ज नही कराते और अगर दर्ज करा भी दिया तो दोषी व्यक्ति अथवा कंपनी को कोई ख़ास कड़ी सजा नही मिल पाती है जिससे दुसरे लोग कुछ सबक ले सकें. चीन की अदालत का दोषियों को कड़ी सजा देने का फैसला निश्चित रूप से सराहनीय है. परन्तु मृत्यु दंड कुछ ज्यादा ही नही हो गया?

बहहाल, भारत सरकार को भी इससे कुछ सीख लेते हुए ऐसे मामलों में कुछ कड़े कदम उठाने चाहिए। कुछ कड़े क़ानून बनाने चाहिए। हर जिले में एक निश्तित स्थान पर कम से कम एक कंज्यूमर फोरम की स्थापना होनी चाहिए ताकि ग्राहकों को शिकायत दर्ज कराने में दिक्कतों का सामना न करना पड़े और देश के नागरिकों की स्वास्थ्य की रक्षा हो सके.

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