जब से
तुम
मिल गए,
मौसम के
सुनहरे पंख
खुल गए ।

अगणित
कलियों पर
चाँद चमका है,
जब से
तुम्हारा
घूँघट सरका है ।

बागवान के
जैसे,
दिन फिर गए ।

पवन की
झप-झप
सनसनी लिए है;
जब से
तुम्हारे आँचल से
झोंके मिले हैं ।

गरमाते बदन
सिहर
सिहर गए !
[] राकेश 'सोहम'

5 Comments:

हृदय पुष्प said...

गुलाबी रंगत लिए म्रदुल अहसास कराती सुंदर रचना के लिए बधाई.

Suman said...

nice

संजय भास्कर said...

हर रंग को आपने बहुत ही सुन्‍दर शब्‍दों में पिरोया है, बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

संजय भास्कर said...

राकेश 'सोहम' ji
Namaskar...........

Plz visit me new post...............




गरीब हूँ मैं.......


" देश सबका है


......क्यों है.. .......


http://sanjaybhaskar.blogspot.com

RaniVishal said...

बहुत ही खुबसूरत अहसासो से सजी , दिल को बुदबुदती रचना..!!
सादर
http://kavyamanjusha.blogspot.com/