दुश्मनो से भी बढकर, दोस्त की रुसवाईयाँ

हूँ हुजुमे सादगी मे, साथ है तन्हाईयाँ

हो ना दिल मे जब किसी के वास्ते अच्छे ख्याल

ऐब बन जाती है तब, इंसान की अच्छाईयाँ

लग रहा है आदमी दिलकश समंदर की तरह

कितना खारापन है इसमे, साथ मे गहराइयाँ

फक्र का सूरज ठहर जाता है, आकर सिर पे जब

छोटी हो जाती है कंध से प्यार की परछाईयाँ

मै बहुत छोटा हूँ, पर इतना भी छोटा तो नही

आपके कंधे से बढी है , ये मेरी उचाईयाँ

जब उतर जाते है शराब के घुंट सीने मे

लेने लगता आईना-ए-दिल भी तब अंगडाइयां

4 Comments:

कुलवंत हैप्पी said...

बहुत शानदार, रचना...

Udan Tashtari said...

बेहतरीन रचना.

दिगम्बर नासवा said...

LAJAWAAB LIKHA HAI RAVI JI ....SACH MEIN AAJKAL DOST JYAADA RUSWA HOTE HAIN ...

अर्चना गंगवार said...

हो ना दिल मे जब किसी के वास्ते अच्छे ख्याल

ऐब बन जाती है तब, इंसान की अच्छाईयाँ

bahut khoob