साथ जो है तुम्हारा तो हर पल सुहाना लगता है,
न होगा कभी कोई गम ऐसा मुझे लगता है ।
जानते तो नही हैं कि तकदीर में लिखा क्या है,
मगर जो तुम साथ न हुए तो डर लगता है ॥

इस पहेली को समझने में एक ज़माना लगता है,
है सच यह कि उदास हो तुम मुझसे दूर होकर ।
पर हँसता चेहरा तुम्हारा एक बहाना सा लगता है ॥

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तुम कहते कहते ही यहाँ कुछ बात ऐसी कह गए,
रोका बहुत हमने मगर दो आँसू फ़िर भी बह गए ।
रोये बहोत हैं गम में छुप-छुपकर अकेले ही यूँही,
सोचा नही था पर खुशी में भी यह साथ मेरे रह गए ॥

3 Comments:

अनिल कान्त : said...

दिल के जज्बातों को आपने दिल से रखा है

mehek said...

इस पहेली को समझने में एक ज़माना लगता है,
है सच यह कि उदास हो तुम मुझसे दूर होकर ।
पर हँसता चेहरा तुम्हारा एक बहाना सा लगता है ॥
waah bahut hi badhiya badhai

दिगम्बर नासवा said...

साथ जो है तुम्हारा तो हर पल सुहाना लगता है,
न होगा कभी कोई गम ऐसा मुझे लगता है ।
जानते तो नही हैं कि तकदीर में लिखा क्या है,
मगर जो तुम साथ न हुए तो डर लगता है ॥

अद्भुद रचना, मज़ा आ गया, BHAVPOORN RACHNA HAI