ये और बात है हम तुमको याद आ ना सके



शराब पी के भी हम तुमको भुला ना सके



ये फासलो की है बसती इसी लिये यारो



वो पास आ ना सके हम भी पास जा ना सके



सुकु दिया है ज़माने को मेरे नगमो ने



अज़ीब बात है खुद को ही हम हसा ना सके

7 Comments:

श्याम कोरी 'उदय' said...

सुकु दिया है ज़माने को मेरे नगमो ने
अज़ीब बात है खुद को ही हम हसा ना सके
....बहुत खूब,प्रसंशनीय!!!!

संजय भास्कर said...

हर रंग को आपने बहुत ही सुन्‍दर शब्‍दों में पिरोया है, बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

संजय भास्कर said...

ग़ज़ब की कविता ... कोई बार सोचता हूँ इतना अच्छा कैसे लिखा जाता है

दिगम्बर नासवा said...

बहुत ही खूबसूरत अल्फ़ाज़ ....

धीरज शाह said...

सुन्दर नगमा।

Udan Tashtari said...

वाह! बहुत शानदार!

amritwani.com said...

शराब पी के भी हम तुमको भुला ना सके
AMARA BHI YAHI HAL HE

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