पत्थर की है दुनियाँ जज़्बात नही समझती

दिल मे क्या है वो बात नही समझती

तन्हा तो चाँद भी है सितारो के बीच

मगर चाँद का दर्द बेवफा रात नही समझती

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हम दर्द झेलने से नही डरते

पर उस दर्द के खत्म होने की कोई आस तो हो

दर्द चाहे कितना भी दर्दनाक हो

पर दर्द देने वाले को उसका एहसास तो हो

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उनको अपने हाल का हिसाब क्या देते

सवाल सारे गलत थे हम जवाब क्या देते

वो तो लफ्ज़ो की हिफाज़त भी ना कर सके

फिर उनके हाथ मे ज़िन्दगी की पुरी किताब क्या देते

6 Comments:

vigyanchopal said...

apki gazal dil ko chu gaye

संजय भास्कर said...

बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति ।

संजय भास्कर said...

बहुत सुंदर और उत्तम भाव लिए हुए.... खूबसूरत रचना......

संजय कुमार
हरियाणा
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

Udan Tashtari said...

उनको अपने हाल का हिसाब क्या देते

सवाल सारे गलत थे हम जवाब क्या देते

वो तो लफ्ज़ो की हिफाज़त भी ना कर सके

फिर उनके हाथ मे ज़िन्दगी की पुरी किताब क्या देते


-बहुत खूब!

अर्चना गंगवार said...

दर्द चाहे कितना भी दर्दनाक हो

पर दर्द देने वाले को उसका एहसास तो हो

kamaaaaaaaaaaaal ki baat kahi hai..

her dard kam ho jata
ger dard,dene walo ko dard ho jata

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वो तो लफ्ज़ो की हिफाज़त भी ना कर सके

फिर उनके हाथ मे ज़िन्दगी की पुरी किताब क्या देते

aapke shabdno ne aaj ahesaas ki nayi gaherai ko chua hai.....

likhte rahiye....

राकेश 'सोहम' said...

एकदम समकक्ष कि कोई पुराना गीत हो - दुनिया करे सवाल तो हम क्या ज़वाब दें ?
सुन्दर भावाभिव्यक्तिपूर्ण रचना है रवि जी .