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पत्रों से
अब दिल
बहलाया नहीं जा सकता ।

प्यार भरी पाती
भावों का संगम
जीवन का
परिणय संवाद अब
झुठलाया नहीं जा सकता ।

कोमल भावनाओं की महक,
हर शब्द में
मिलन की कसक ।

प्यार की सौगातों की
लम्बी कथा,
कह गई पाती
सारी व्यथा ।

प्यार के उपहार में
शब्दों के जाल में, मैं
जब-जब भटक जाता हूँ;
सच कहूं
क्या करू
कुछ समझ नहीं पाता हूँ !
[] राकेश 'सोहम'