करता हूँ जब दीदार तेरा, मन हर्षित हो जाता है
रहमत बरसे बनकर बादल, मन मयूर हो जाता है
तेरे इक इशारे से मुकद्दर बदल जाता है
पतझड़ के मौसम में भी बसंत छा जाता है
जो भी माँगा दिया तुने इक निगाहें कर्म से
होता नही जो भाग्य में इंसा वो पा जाता है
अंधेरे में भटका आनंद करता जब फरियाद है
अमावस में भी पूनम का चाँद निकल आता है.
रावण बेहोस हो गया
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एक दिन रावण डिस्को गया.
और वहाँ जाकर वह बेहोश हो गया.
क्यूँ? …………
क्योकि…. वहाँ गेट पर लिखा था, “एंट्री फीस रू0. 1500/- पर हेड ”
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16 years ago
1 Comments:
achha laga............
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