दर्द के हिंडोले मे झूल रहा हू मैं
आंसुओं के सागर मे डूब रहा हूँ मैं
कब आयेगा तू आने वाले ये तो बता
बिन तेरे तन्हा हो रहा हूँ मैं
कब तक कटेगी यादों के सहारे ये रातें
कुछ तो भ्रम रख लो की होंगी मुलाकातें
मेरी आँखों मे झांकते सितारों की गवाही ले लो
पलकों पे तैरते आंसुओं की कसम ले लो
जुदाई के नश्तर जब भी चुभते हैं
लहुलुहान दिल को, सीना चाक कर देते हैं
तन्हाईयाँ भी मेरी बेबसी पर हंसने लगी हैं
अरमानो की चिताएं भी सजने लगी हैं
चांदनी भी आग लगाने को तैयार खडी है
लौट आओ की संभल जाए ये दिल
वरना तो कहानी अपनी ख़त्म होने लगी है।

अपनी मर्जी से लोग हमारे दिल में आकर बस जाते हैं.



हमारे दिल को अपना घर और हमे अपना कहकर बुलाते हैं.


जब जाना होता है उनको तो हँसकर  चले जाते हैं.


उनको क्या मालूम कि वो हमारे दिल को कितना दर्द दे जाते हैं.


…Happy Valentine’s Day
जब से
तुम
मिल गए,
मौसम के
सुनहरे पंख
खुल गए ।

अगणित
कलियों पर
चाँद चमका है,
जब से
तुम्हारा
घूँघट सरका है ।

बागवान के
जैसे,
दिन फिर गए ।

पवन की
झप-झप
सनसनी लिए है;
जब से
तुम्हारे आँचल से
झोंके मिले हैं ।

गरमाते बदन
सिहर
सिहर गए !
[] राकेश 'सोहम'

सीने मे लिये तेरी यादो को


हम तो दुर कही चले जायेंगे


या वादिया ये मौसम और ये नज़ारे


इन्हे हम तो कभी ना भूल पायेंगे


क्या भूलू क्या याद करू


अपनी यादे तुझको सौगात करू


वादा नही पर एक चाह है दिल मे


तुमको मिलने को हम फिर आयेंग़े


जिन्दगी नही तो चन्द लम्हे ही बितायेंगे


ए मेरे शहर शायद हम भी तुझको याद आयेंग़े
छलनी आत्मा पर मरहम मत लगाना
अब बहुत देर हो चुकी है
टूटे सपनो को अब मत सजाना
अब बहुत देर हो चुकी है
गम के समंदर मे ख़ुशी की नाव मत चलाना
अब बहुत देर हो चुकी है
कुचले हुए फूलो को पानी के छींटे मत देना
अब बहुत देर हो चुकी है
मुझे धरा पर गिरा कर आसमान मत दिखाना
अब बहुत देर हो चुकी है
अक्स मेरा मिटा कर उसे फिर मत खोजना
अब बहुत देर हो चुकी है.

मेरे कमरे की खिड़की से

रोज़ सुबह

मुस्कुराता हुआ आता है

सूरज

मेरे सारे क्रिया कलापों का

गवाह बनता है

सूरज

मेरे जीवन की कशमकश और

ज़द्दोज़हद को

बड़ी शिद्दत से देखता है

सूरज

कहता कुछ नहीं, बस

मूक दर्शक बना रहता है

सूरज

और शाम को जाते हुए

रोज़ मेरी उम्र का एक दिन

साथ ले जाता है

सूरज


जो था, वो अब नहीं है


जो है, वो सब नहीं है


सबकी पसंद है वो


फिर भी वो रब नहीं है


उसकी वफ़ाएं – ख़ारिज


जिसमें, अदब नहीं है


वो , क्या करेगा हासिल


जिसमें - तलब नहीं है


ईमान का करें क्या?


ईनाम जब नहीं है


इस - भागते सफ़र में


कुछ भी अजब नहीं है