कोई कमजोरी सी लगती है, ज़िन्दगी के हर मोड़ पर कुछ कमी सी लगती है,


पता नही कहाँ ले जायेगी मेरी राह मुझे,


एक तेरे सिवाह हर मंजिल अजनबी सी लगती है।

आरजू तो है मेरी तुझे हर पल देखती रहूँ ऐ दोस्त,


पर अब हर तम्मान्ना मेरी अधूरी सी लगती है।

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कोई ज़ज्बातों से खिलवाड़ करता है तो कोई दिल तोड़ देता है
और कोई होता है जो हमेशा वफ़ा करके बेवफाई झेलता है
कितने प्यार से और तहजीब से बनाया होगा इस धरती को खुदरत ने
लेकिन यहाँ तो इन्सान अपने मतलब के लिए उस खुदा के नाम से भी खेलता है...

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अपना सब कुछ लुटा दिया हम ने,


अपनी नादानी के कारनामो में,


अब बचा नही कुछ भी सिवाय दर्द के,


ज़िन्दगी के बचे हुए लम्हों में,


खो दी है हमने वो सारी खुशिया,


जो हमें मिलसकती थी आज की ज़िन्दगी में,


अब इसका शिकवा कर के क्या फायदा,


मैंने ख़ुद ही तो डुबोया है अपने आप को ग़मों के समंदर में।


साभार- अनजान


दोस्ती मेरी बस उस ग़म से है,
मिला जो मुझे सनम से है।
तुझसे गिला नहीं है मुझको,
शिकवा इस मौसम से है।
हमसे क्यों छुपाती चेहरा,
तेरा हुस्न भी तो हम से है।
मुझसे और दूर न जा तू,
मेरी साँस तेरे दम से है।
मुझे और कुछ चाह नहीं,
बस तू मेरी कसम से है।

ज़िन्दगी ने मुझे बहुत कुछ सिखाया
तन्हाई मे जीना सिखाया
प्यार को छुपाना सिखाया
दोस्तो से हसके मिलना सिखाया
और मन ही मन रोना सिखाया
अब तो क्या कहुँ,
ज़िन्दगी ने बहुत कुछ सिखाया
मगर जीना नही सिखाया
कहने को तो हमारी धरती की सतह का ७०-८० प्रतिशत भाग पानी से घिरा है किंतु धरती सा कुल पानी का मात्र २.७ प्रतिशत से भी कम हिस्सा हमारे उपयोग का है। इसमे भी प्रदूषण की समस्या दिनोदिन गहराती जा रही है। आज भारत में ही नही वरनसमूचे विश्व में जल संकट गहराता जा रहा है। धरती पर जल और जीवन का बड़ा गहरा रिश्ता है जेसे सूरज और उसकी किरणों का। पानी प्रकृति की सबसे अनमोल और अनुपम भेंट है जो जीवन के हर क्षेत्र में तथा हर कदम पर मानव प्रजाति के लिए अनिवार्य और अपरिहार्य है। इतना होने पर भी विश्वभर में शायद ही कोई वस्तु होगी जो पानी से भी ज्यादा आम हो। यह विडंबना ही है की हम पानी के जीवनदायी गुणों को बहुत ही सामान्य तरीके से लेते हैं। वैज्ञानिको के अनुसार तो पानी की संरचना बहुत ही आसान मानीजाती है। अर्थात दो परमाणु हाईड्रोजन के और एक परमाणु ओक्सीजेनका , तथापि मानव अपने स्तरपर इसका निर्माण नही कर पाया और न ही कर सकता है। ज़रा निम्न कथन पर गौर करें
''पानी एच-२ ओ है यानी दो भाग हाईड्रोजन के और एक परमाणु ओक्सीजेन का , लेकिन उसमे एक तीसरी चीज भी है और उसे कोई नही जानता । तीसरी चीज कोई भी नही समझ पाया, लेकिन यह परमात्मा का आर्शीवाद है जो एक विधुत ऊर्जा की तरह इन दो तत्वों के समूह से पानी बना सकता है। यह प्रकृति का विलक्षण यौगिक है, इसलिए वह सबसे रहस्यमय और वन्दनीय भी है।''
उपरोक्त कथन है- आन वाटर , डीलारेंस और दथर्ड थिंग , पर्सीज

पानी पर बहुत कुछ लिखा जा चुका है और लगातार लिखा जा रहा है। वैज्ञानिक, अनुसंधानकर्ता और रसायनशास्त्री लगातार पानी पर अनुसन्धान कर रहे हैं। पानी बचाने के विविध उपायों के बारे में बताया जाता है, पानी के संरंक्षण के बारे में आए दिन संगोस्टियाआयोजित होती रहती हैं। सरकारी स्तर पर कायदे कानूनों का भी प्रावधान है। इसके बावजूद भी लोगों में अभी तक पानी के प्रति सम्पूर्ण चेतना और जागृति का अभाव है। लोगो का पानी से भावात्मक जुडाव नही हो पा रहा हैं, जेसा होना चाहिए। हांलाकि लोगो में पानी के प्रति कुछ संवेदनशीलता और जागरूकता तो हुई है, पर यह सिर्फ़ ऊपर ऊपर ही ह। रही सही कसरइच्छाशक्ति ने पूरी कर दी है। निर्बल इच्छा शक्ति के कारण पानी का दुरूपयोग नही रुक पा रहा हैं। दृढ़ संकल्पबल के अभाव में यह लगभग मुश्किल प्रतीत होता है।
पानी का दुरुपयोग करके हम अपनी आनेवाली पीडियोंके लिए मुश्किलें बढाते जा रहे हैं। जल के बिना भविष्य का जीवन केसा होगा इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। क्योंकि जीवन हर तरह से जल पर ही निर्भर है। हमें चाहिए की हम इसे संरक्षित रखे और दुरूपयोग तो कदापि न करें।
हमें पानी की महत्ता को, महानता को अनुभव करना होगा , इस से अपनी संतान की तरह से एकात्मक , भावात्मक स्नेहात्मक अनुभूति होगी तो ही पानी बचेगा और पानी का बचना ही पानी का निर्मित होना है। इसमे किसी क़ानून की आवश्यकता नही है, बस लोगो को ख़ुद ही आगे आना होगा। यही जल के प्रति हमारी कृतज्ञता होगी।
प्रिया पानी तुम कितने महान हो
सृष्टि के प्राणों का अवधान हो
अम्बर की तुम अजीम शान हो
वनोप्वन की मधुर मुस्कान हो
सारे संसार की तुम जान हो
सागर नदियों की पहचान हो
जात पात उंच नीच से दूर
सबका रखते बहुत मान हो
कभी नही जताते नही एहसान हो
फ़िर भी हम तुम्हारी क़द्र नही करते
पानी हमारी खता माफ़ कर देना
हम तुम्हे कभी बना नही सकते
फ़िर भी कितना व्यर्थ हैं बहाते
और प्रदूषित भी तो कितना हैं करते
फ़िर भी पानी तुम नाराज नही होते
हर पल सबका ध्यान हो रखते
पानी हमारी खता माफ़ कर देना
हम कभी तुम्हारी क़द्र नही करते
पानी हमारी खता माफ़ कर देना
हम कभी तुम्हारी क़द्र नही करते
सावन में जब मेघ मल्हार गाते हैं
पल में ज़लथल एक कर जाते हैं
निष्ठुरता कहूँ या उदारता इनकी
महलों को तो ऊपर से ही करे सलाम
झोंपडो को अंदर तक भिगो जाते हैं
बिल्कुल निरंकुश , मनमौजी हो जाते हैं
कभी चमकाते , कभी बिजलियाँ गिरा जाते हैं
पानी से ही आग लगाते , पानी से ही बुझाते हैं
कर देते हैं मस्त , कभी लस्त पस्त कर जाते हैं
किसी आँगन में तो झूम कह बरसें
कहीं खामोशी से गुज़र जाते हैं,
ये केसे मेघ मल्हार हैं मियाँ
कभी वेदना कभी आनंद दे जाते हैं.

12 जुलाई को छत्तीसगढ के राजनांदगांव जिले में नक्सलियों ने एक के बाद एक तीन जाल बिछाए और हर बार पुलिसकर्मियों के एक – एक दल की निर्ममतापूर्वक हत्या कर दी। एक ही दिन में नक्सलवादियों ने एक पुलिस अधीक्षक सहित 39 पुलिसवालों की हत्या कर दी। देश की सुरक्षा पर यह हमला मुम्बई पर हुई आतंकवादी हमले से कम तो नहीं॥ लेकिन देश में कितनी चर्चा हुई सुरक्षाकर्मियों के इस भयावह नरसंहार की?

राष्ट्रपति के पुलिस पदक से सम्मानित, छत्तीसगढ के एक पुलिस अधीक्षक सहित 39 जवान नक्सलियों द्वारा बारुदी सुरंग से उड़ा दिए गए, लेकिन राष्ट्रीय टीवी चैनल “राखी का स्वयंवर” और सलमान खान का “दस का दम” दिखाने में व्यस्त रहे। किसी भी फिल्मी व्यक्तित्व या खिलाड़ी के विदेश में पुरस्कारी जीतते ही बधाई पत्र जारी करने वाला राष्ट्रपति भवन ने देश की रक्षा में शहीद हुए इन जवानों को लिए एक शब्द भी नहीं कहा।

मुम्बई एक महानगर है और छत्तीसगढ, ग्रामीण भारत का हिस्सा, इसीलिए नक्सलियों का यह हमला मुम्बई पर हुए आतंकवादी हमले से कम है। है न?

दिल्ली में मेट्रो पुल गिरने से छह लोगों की मौत की खबर दो दिनों से छाई हुई है, इंग्लैंड- ऑस्ट्रेलिया के बीच एशेज का पहला टेस्ट ड्रॉ होने का विशेषज्ञ विश्लेषण किया जा रहा है, राखी सावंत का स्वयंवर, सलमान खान के टीवी शो में कंगना रानौत की उपस्थित और हॉलीवुड में मल्लिका शेरावत की धूम- ये सब हमारे टीवी चैनल की सुर्खियां थे, छत्तीसगढ में बारुदी सुरंग लगा कर उड़ाए गए सुरक्षाकर्मी सिर्फ चलताऊ खबर।

गृहमंत्री, प्रधानमंत्री, राष्ट्र्पति, रक्षामंत्री चुप हैं इस हमले पर। देश के बीचोंबीच, 200 से 500 नक्सली पहले केंद्रीय सुरक्षा बलों के 10 जवानों की हत्या करते हैं, फिर उसकी जांच करने गए पुलिस दल को गाजर-मूली की तरह काट देते हैं और सरकार की तरफ से कोई एक शब्द भी नहीं बोलता।

एक युवक दो समुदायों के बीच नफरत फैलाने के लिए जहर उगलता है और सांसद बन जाता है। फिर जेड श्रेणी की सुरक्षा की मांग करता है क्योंकि कथित तौर पर उसकी जान को खतरा है। दूसरा नेता दो प्रांतों के लोगों के बीच नफरत की खाई खोद कर, सरकार से प्राप्त ज़ेड श्रेणी की सुरक्षा के साये में अपनी राजनीति की दूकान चलाता है क्योंकि उसकी जान को खतरा है। ये दोनों जब मुंह खोलते हैं या अदालत जाने के लिए घर से कदम निकालते हैं तो टीवी चैनल उसके एक-एक क्षण का “लाइव” प्रसारण करते हैं। लेकिन ग्रामीण इलाके का एक पुलिस अधीक्षक नक्सलियों द्वारा घेर कर क्रूरतापूर्वक मार दिया जाता है और उसकी चर्चा तक नहीं होती।

मुम्बई पर हुए आतंकवादी हमले के दौरान एटीएस प्रमुख करकरे, एनकाउंटर स्पेशलिस्ट विजय सालस्कर और एसीपी काम्टे की आतंकवादियों के हाथों किस तरह हत्या हुई थी, उसकी बहुत चर्चा हुई थी। पढ़िए राजनांदगांव के पुलिस अधीक्षक विनोद चौबे और उनके साथियों को किस तरह घात लगा कर मारा गया: (रिपोर्ट साभार : देशबंधु)

“मदनवाड़ा पुलिस कैम्प में दो पुलिसकर्मियों की हत्या की खबर मिलते ही आईजी मुकेश गुप्ता तथा राजनांदगांव एसपी विनोद कुमार चौबे अलग-अलग वाहनों से घटना स्थल की ओर रवाना हो गए और मानपुर पहुंचे।
मानपुर से लगभग 11 बजे एसपी चौबे पूरे दल बल के साथ वहां से लगभग 9 किलोमीटर दूर स्थित राजनांदगांव के मदनवाड़ा के लिए रवाना हो गए। मदनवाड़ा पुलिस पोस्ट से कुछ दूर पहले ही नक्सलियों ने एसपी के ड्राइवर को गोली मार दी।
इसके बाद पुलिस अधीक्षक विनोद चौबे व उनके साथ गए जवान गाड़ी से उतर गए और मोर्चा संभाल लिया।
नक्सलियों ने पुलिस दल पर चारों ओर से जबरदस्त फायरिंग शुरू कर दी। जवानों का नेतृत्व कर रहे एसपी विनोद चौबे ने काफी देर तक नक्सलियों से लोहा लेते रहे, लेकिन नक्सलियों की एक गोली एसपी चौबे के कंधे पर जा लगी और इससे पहले की वे संभलने की कोशिश कर पाते नक्सलियों ने उनपर गोलियों की बौछार कर दी। एसपी चौबे की मौत के बाद भी जवानों ने मोर्चा संभाले रखा, लेकिन नक्सलियों ने पूरे इलाके को चारों तरफ से ऐसे घेर रखा था कि जवानों को बच निकलने का कोई रास्ता नहीं था।

पूरे इलाके पर नक्सलियों ने कब्जा कर रखा है, जिसके चलते पुलिस को बचाव करने का मौका भी नहीं मिल पाया। बताया जा रहा है कि इस वारदात में दोपहर 1 बजे तक मोहला थाना प्रभारी विनोद धु्रव व एएसआई कोमल साहू के अलावा 21 जवान शहीद हो चुके थे। शाम होते-होते शहीद होनेवालों की संख्या बढ़कर 30 हो गई, जो देर रात तक 34 हो गई।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक मानपुर मोहला इलाके के मदनवाड़ा, सीतागांव सहित करीब चार गांवों में नक्सलियों ने डेरा डाल रखा है।” .... चार गांवों में नक्सलियों ने डेरा डाल रखा है लेकिन न तो राज्य सरकार, और न ही केन्द्र सरकार इस पर कुछ बोलती है।


बहादुरी के लिए राष्ट्रपति पदक से सम्मानित एक पुलिस अफसर और 39 जवानों की मौत देश को या सरकार को हिलाने वाली खबर नहीं है.. समलैंगिकों को आपसी सहमति से सेक्स-संबंध बनाने की अदालती छूट मिलने की खबर, सप्ताह भर तक दिन-दिन भर दिखाने वाले टीवी चैनलों की खबर नहीं है..। देख कर लगता है, छत्तीसगढ़ भारत का हिस्सा है भी या नहीं? ...

Saabhaar – Josh18
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