आप रोज ही आईने में खुद को देखते हैं. जो कुछ दिखाई देता है वो क्या है? वह आप ही का अक्श होता है. आइये ज़रा खुद को आईने में देखने की प्रक्रिया को वैज्ञानिक तरीके से समझें. शुरुआत होती है रौशनी के हमारे शरीर से टकराने से. रौशनी हमारे शरीर से टकरा कर आईने पर पड़ती है और फिर वहा से परावर्तित (रिफ्लेक्ट ) होकर फिर हमारी आँखों में पड़ती है, तब जाकर हमे हमारा अक्श दिखाई पड़ता है. प्रकाश की रफ़्तार (3 लाख किमी प्रति सेकेण्ड) इतनी तेज है कि इस प्रक्रिया का हमे पता ही नही चलता. 

अब कल्पना कीजिये कि यदि इस प्रक्रिया को धीमी कर दिया जाए तो क्या होगा? अगर प्रकाश कि रफ़्तार धीमी नहीं की जा सकती तो ज़रा यह सोचिये कि यदि इस समय आप की उम्र 25 साल की हो और आप जिस आईने में देख रहे हैं वह आप से इतनी ज्यादा दूरी पर हो कि वहा तक आप की रौशनी  को पहुचने में 20 वर्ष लगते हों यानी दर्पण 20 प्रकाश वर्ष दूर हो (मान लीजिये कि वह चीज दर्पण के स्थान पर कोई चन्द्रमा जैसी बड़ी गृह या उपग्रह हो जो प्रकाश परावर्तित करने कि क्षमता रखता हो), तो ऐसी स्थिति में हमारे शरीर से परावर्तित रौशनी को उस परावर्तक तक पहुचने में 20 वर्ष लगेंगे और वहा से लौटकर हमारी आँखों में पड़ने में 20 वर्ष और लगेंगे. तब तक हमारी उम्र 20 + 20 = 20 वर्ष और बढ़ चुकी होगी यानी तब हम 65 वर्ष के होंगे किन्तु आईने में हमे हमारी उम्र 25 वर्ष की ही दिखाई देगी, अर्थात हम बुढ़ापे में हमारी जवानी देख रहे होंगे. कहने का सारांश यह था कि सैद्धांतिक तौर पर भूतकाल को देखना संभव है.

इसी को और बड़े स्केल पर देखा जाए (यानि परावर्तक ग्रह की दुरी बढ़ाकर) तो संभव है कि हम अपने किसी ख़ास दादा दादी, नाना नानी या किसी भी ऐसे व्यक्ति से मिल सकते हैं जो आज दुनिया में जीवित नही है.
सूरज से धरती तक रौशनी को आने में 8 सेकेण्ड लगते हैं, यानी सूरज पर हम जो कुछ भी देखते हैं, वह 8 सेकेण्ड पहले हो चूका होता है. इसी प्रकार हम आसमान में बहुत से ऐसे तारों की रौशनी देखते हैं जो कभी जीवित थे, पर आज वो वहाँ नही हैं.

तलाश करो कोई तुम्हे मिल जायेगा.


मगर हमारी तरह तुम्हे कौन चाहेगा.

ज़रूर कोई चाहत की नज़र से तुम्हे dekhega ,

मगर आँखें हमारी कहाँ से लाएगा.





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समझा दो अपनी यादों को,

वो बिन बुलाये पास आया करती हैं.

आप तो दूर रहकर सताते हो मगर,

वो पास आकर रुलाया करती हैं.





The last day of this year






Thanks to those who hated me,

They made me a stronger person.




Thanks to those who loved me

They made my heart bigger.




Thanks to those who were worried about me

They let me know that they actually cared.




Thanks to those who left me

They made me realize that nothing lasts for ever.




Wish you an excellent 2012 with peace, prosperity and happiness.



From-

Ravi Srivastava

गुल ने गुलशन से गुलफाम भेजा है.

सितारों ने आसमां से सलाम भेजा है.

मुबारक हो आप को नया साल,

हमने दिल से ये पैगाम भेजा हैं.

उसके  बिन  चुप -चुप  रहना  अच्छा लगता  है.   

ख़ामोशी  से  एक  दर्द  को  सहना  अच्छा लगता  है.
जिस  हस्ती  की  याद  में  आंसू  बरसते  हैं.

सामने  उसके  कुछ  न  कहना  अच्छा  लगता  है.

मिलकर  उससे  बिछड़  न  जाये,  डरते  रहते  हैं.

इसलिए  बस  दूर  ही  रहना  अच्छा  लगता  है.

जी  चाहे  अपनी  सारी  खुशियाँ  लाकर  उसको  दे  दूं.

उसके  प्यार  में  सब  कुछ  खोना  अच्छा  लगता  है.

उसका  मिलना  न  मिलना  किस्मत  की  बात  है.

पल  पल  उसकी  याद  में  रहना  अच्छा  लगता  है.

उसके  बिना  सारी  खुशियाँ  अजीब  लगती  हैं.

रो  रोकर  उसकी  याद  में  सोना  अच्छा  लगता  है.

हमें प्यार जाताना न आया कभी,

बस  इतना  जानते  हैं कि,

उसको  चाहते  रहना  अच्छा  लगता  है.



स्रोत: अनजान

कितना  प्यार  है  उनसे  हमे,    उन्हें  ये  मैं  बताऊँ  कैसे.

दिल  में  बसे  हैं  वो  किस  कदर, इसे  चीर  कर  उन्हें  मैं  दिखाऊं  कैसे.    


उन्हें तो  फुर्सत  ही  नहीं  हमारे  प्यार के  लिए,  

और  उनकी  याद  में, ये हर  पल  मैं बिताऊं  कैसे.    

कितना प्यार है उनसे हमे, उन्हें ये मैं बताऊँ  कैसे.         



न  मिल  पाने  की  मज़बूरी,  बात  भी  तो नहीं होती  थोड़ी , 

अपने  इस  नादान  दिल को,  फिर  बोलो  मैं समझाऊं  कैसे.  



आँखों  में हर पल है वो, दिल-ओ -दिमाग  पे  वही  है छाए,      

कोई  जरा  बता  दे  मुझे , दिल-ओ-दिमाग से  उसे  मिटाऊं  कैसे.   



हाँ, दिल में बसे हैं वो इस कदर, इसे चीर कर उन्हें मैं दिखाऊं  कैसे     


 
स्रोत: अनजान
प्रत्येक जीवन में कुछ समस्याएं होती हैं। हमें अपनी खुशी की रचना करने के लिए और अपने पंख को पसारने के लिए निरंतर अपने जीवन को चलाना तथा प्रयास करना होता है। कभी-कभी खुद तय सीमा से ऊपर जाने के लिए प्रयास करने की आवश्यकता होती है।






जांच कीजिए कि अपने जीवन के सम्बंध में आप क्या महसूस करते हैं? आगे जाइए और जांचिए कि वे वास्तविक है या आप केवल उसकी कल्पना कर रहे हैं। एक बार जब हम अपनी सीमा को पहचानते हैं तब यह हम में से प्रत्येक पर है कि हम उससे ऊपर जाएं।






किस चीज को आप असंभव महसूस करते हैं या क्या-क्या बाधाएं या अवरोध हैं जिन पर कामयाबी हासिल करने की आवश्यकता है? इन सभी को पहचानें। आपको यह समझना होगा या तय करना होगा कि समस्या से लड़ना अधिक फायदेमंद होगा कि अपनी योग्यता को बढ़ाने से या अपने जीवन स्तर के विकास करने से।






खुश रहने का एक तरीका है कि आप जो भी करना चाहते हैं या कर रहे हैं, उसमें कम चिंता करें, आराम से करें। हमारे पास अपनी रचना है उसे हमें अधिकांश समय देना चाहिए। जबकि प्रतिकूल स्थिति किसी समय किसी वातावरण में हो सकती है। इसके लिए अपने आप को दोषी कभी नहीं मानें। यह आपके लम्बे समय की खुशी को नष्ट कर देगा।






दोषारोपण का खेल या गलती खोजने की आदत सिर्फ आपको तुच्छ बनाती है। आपको अपनी खुशी के लिए नकारात्मक प्रभाव से बचना होगा। आप अपनी आशा को कम मत कीजिए चाहे काले बादल आपके ऊपर मंडरा रहे हों। यदि भगवान आपको समस्या देता है तो वह इस समस्या से जूझने की ताकत भी देता है।






हम अपने जीवन में खुद जो प्राप्त करते हैं, वह हमारी सीमा है। कुछ व्यक्ति पुर्वानुमान से किसी कार्य को शुरू करते हैं कि यह कार्य नहीं हो सकता है यह उनके नाकारापन को साबित करता है। यह बहुत महत्वपूर्ण बात है कि समय किसी व्यक्ति का इंतजार नहीं करता है।






आप अपनी वर्तमान प्राथमिकताएं देखें और जांचें कि उनको पुन: व्यवस्थित करने की आवश्यकता है या नहीं। उसमें समय की व्यवस्था भी शामिल है। आपके पास अपने परिवार के साथ समय व्यतीत करने का भी समय होना चाहिए। बिना किसी बाह्य वातावरण के यह एक छोटा सा अंतरावलोकन हो सकता है और बिना अधिक पैसों से आया कि आप साधारण रूप से देख सकते हैं कि आप के पास नए प्रकाश तथा नए सम्बंध में क्या है? आप किसी रोग का उपचार नहीं कर सकते हैं यदि आप आधारभूत कारणों का उपचार नहीं करेंगे।






एक नया प्रयास और एक नई दृष्टिकोण आपको अपने जीवन में जहां आप कभी महसूस करते हैं उसे तय करने के योग्य बना सकता है। किसी चीज को बदलने के लिए कभी भी अपने आप को कमजोर न समझें। हमारी इच्छा किसी वस्तु का विकास नहीं करती है। जहां हम महसूस करते हैं कि उसका होना हमारे लिए अच्छा है उसके लिए हमें सकारात्मक कार्य करना होता है।






हम सभी जानते हैं कि हम हमेशा के लिए जीवित नहीं रहने जा रहे हैं। यह हमें महसूस करवाता है कि प्रत्येक दिन बहुमूल्य है। हमें अपना सबसे अच्छा अवश्य देना चाहिए तथा इस धरती पर जो भी समय हमें दिया गया है इसका आनंद लेना चाहिए।




खुशी, उत्साह, परमानंद, उमंग से परिपूर्ण जीवन का रहस्य इस पर निर्भर नहीं करता है कि आपके पास क्या-क्या वस्तु है या अपने समाज में क्या आनंद लिया है। यह इस पर निर्भर करता है कि जीवन में आपका प्रयास या दृष्टिकोण क्या है? अपने जीवन को अपने तरीके से जीना तथा आप जो चाहते हैं उसे करना आप कब चाहते हैं तथा प्रत्येक मिनट इसका एहसास होना इन सभी पर आपके जीवन की खुशी निर्भर करती है।

 
With Spl.Thanks to Josh18...
मत देख कि कोई शख्श गुनाहगार कितना है.


यह देख कि तेरे साथ वफादार कितना है.

ये मत सोच कि उसे कुछ लोगों से नफ़रत भी है.

यह देख कि उसको तुझसे प्यार कितना है.


मत देख कि वो तनहा क्यूँ बैठता है इतना.


ये देख कि उसे तेरा इन्तिज़ार कितना है.


ये मत पूछ उसको तुझसे प्यार कितना है.


उसको ये बता कि वो तेरा हक़दार कितना है.

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 हर मुश्किल इम्तिहान नहीं होती.


मोहब्बत खामोश रहती है, बेजुबान नहीं होती.


एक एक कदम पर फितरत बदलती है जिंदगी.


जब हमको मंजिलों की पहचान नहीं होती.


Source: Unknown

वो खामोश और हम परेशान क्यों हैं,
वो मशहूर और हम बदनाम क्यों हैं.
उनकी आवाज हमारे दिल की धड़कन है,
ये जानकर भी वो अनजान क्यों हैं.

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दिल के ही नहीं जान के करीब है वो,
हर पल साथ रहता है, अपना नसीब है वो.
ख़ुशी की लहर हो या हो गम का साया,
दिल ने हर पल उनको सबसे करीब पाया.

Love is patient,

Love is kind.



It bears all things,

Believes all things,



Hopes all things,

Endures all things.



Love never fails.



And I Said Once

I Don't Need To Be Wanted

I Want To Be Needed









...from -
'MERI PATRIKA'

न जाने ये क्या हो रहा है.


न चाहते हुए भी कोई अपना हो रहा है.


दिल पूरी कोशिश करता है उसे भूल जाने की.


पर न चाहते हुए भी उससे रिश्ता गहरा हो रहा है.






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आज आपके प्यार में कुछ कमी देखी.


चाँद की चांदनी में कुछ नमी देखी.


उदास होकर लौट आये हम अपने घर.


जब महफ़िल आपकी गैरों से सजी देखी.






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जीवन के हर मोड़ पर आशा और निराशा है.


मिलना और बिछड़ना तो प्यार की परिभाषा है.


...from collections.

गुल ने गुलशन से गुलफाम भेजा है.

सितारों ने आसमां से सलाम भेजा है.

मुबारक हो आप को नया साल,

हमने दिल से ये पैगाम भेजा हैं.
 
HAPPY NEW YEAR - 2011







जो ढल जाये वो


शाम होती है

जो खत्म हो जाये

वो ज़िन्दगी होती है

जो मिल जाये वो

मौत होती है

और जो ना मिले

वो मोहब्बत होती है


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हाथ पकडने का वादा था मगर हाथ छुडा लिया

जिसकी जिसे जरूरत थी खुदा ने मिला दिया

शिकायत भला करे किस से

मेरी तक़दीर ने सचाई का चहेरा दिखा दिया

 
...a simply collection
जिन्दगी रोज़ आजमाती है,नित नए गुल खिलाती है
जिनको बामुश्किल भूला,उनकी फिर याद दिलाती है
कभी गम के माहौल मै ख़ुशी देती है,और कभी माहौले ख़ुशी गम देती है
कल जो दिखाते थे खंजर हमको,आज पहना रहे हैं हार हमको
कल जो देखते थे साथ मैं चाँद,आज हिलाते हैं चाँद से हाथ
जिन्दगी का खेल कमाल का है,मसला ये "निरंतर" हर जान का है
जिन्दगी रोज़ आजमाती है,नित नए गुल खिलाती है

...collection
मजारों मैं सोये हुए हैं,अच्छे और बुरे



प्यार और नफरत के चहेते,रंगीन और बदरंग चेहरे


किस्मत किसी की, बदकिस्मती किसी क़ी,


यह मजबूरी ही है, बगल मैं कौन किसके लेटे


कोई बता नहीं सकता, आज क़ी दूरी होगी

क्या कल क़ी नजदीकी?

कोई कह नहीं सकता, आने वाले वक़्त का अहसास

कभी हो नहीं सकता, वक़्त तो वक़्त है

वक़्त पर ही बताएगा, किस का होगा क्या अंजाम


ये वक़्त ही बताएगा.



दुनिया भर में तेजी से पांव पसारते जा रहे एड्स का इलाज अब सम्भव हैं। इस स्थिति की भयावहता का ही यह परिणाम है कि एचआईवी पॉजिटिव होने का मतलब आमतौर पर जिंदगी का अंत मान लिया जाता है, लेकिन यह अधूरा सच है। अगर डॉक्टरों की सलाह के मुताबिक चला जाए तो एचआईवी पॉजिटिव लोग भी लंबे समय तक सामान्य जीवन जी सकते हैं।

क्या है एचआईवी और एड्स ?


एचआईवी (ह्यूमन इम्यूनोडिफिशिएंसी वायरस) एक ऐसा वायरस है, जिसकी वजह से एड्स होता है। यह वायरस एक इंसान से दूसरे इंसान में फैलता है। जिस इंसान में इस वायरस की मौजूदगी होती है, उसे हम एचआईवी पॉजिटिव कहते हैं। आमतौर पर लोग एचआईवी पॉजिटिव होने का मतलब ही एड्स समझने लगते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है।


दरअसल, होता यह है कि एचआईवी के शरीर में प्रवेश कर जाने के बाद शरीर की प्रतिरोधक क्षमता (बीमारियों से लड़ने की क्षमता) धीरे-धीरे कम होने लगती है। प्रतिरोधक क्षमता कम होने से शरीर पर तमाम तरह की बीमारियां और इन्फेक्शन पैदा करने वाले वायरस आदि अटैक करने लगते हैं। एचआईवी पॉजिटिव होने के करीब 8 से 10 साल बाद इन तमाम बीमारियों के लक्षण दिखने शुरू हो जाते हैं। इस स्थिति को ही एड्स कहा जाता है। वैसे, एचआईवी पॉजिटिव होने के बाद से एड्स होने तक के वक्त को दवाओं की मदद से बढ़ाया जा सकता है और कुछ बीमारियों को ठीक भी किया जा सकता है। जाहिर है, एचआईवी पॉजिटिव होना या एड्स अपने आप में कोई बीमारी नहीं हैं, बल्कि इसकी वजह से बीमारियों से लड़ने की शरीर की क्षमता कम हो जाती है और तमाम बीमारियां अटैक कर देती हैं।


कैसे काम करता है एड्स का वायरस -


वायरस (एचआईवी) की वजह से एड्स होता है। यह वायरस शरीर की जीवित कोशिका (लिविंग सेल) के अंदर रहता है। शरीर से बाहर यह आधे घंटे से ज्यादा रह नहीं सकता। यानी खुले में इस वायरस के जीवित रहने, पनपने या फैलने की कोई आशंका नहीं है।


एचआईवी दो तरह का होता है -


एचआईवी-1 और एचआईवी-2


एचआईवी-1 पूरी दुनिया में पाया जाता है और भारत में भी 80 फीसदी मामले इसी के हैं। एचआईवी-2 खासतौर से अफ्रीका में मिलता है। भारत में भी कुछ लोगों में इसका इन्फेक्शन देखा गया है। कुछ लोगों को दोनों वायरस की वजह से इन्फेक्शन होता है। वैसे, एचआईवी-2 इन्फेक्शन वाले लोग एचआईवी-1 वालों से ज्यादा जीते हैं। मां से बच्चे में एचआईवी-2 ट्रांसफर होने के चांस न के बराबर होते हैं।


शरीर में घुसने के बाद यह वायरस वाइट ब्लड सेल्स पर अटैक करता है और धीरे-धीरे उन्हें मारता रहता है।


इन सेल्स के खत्म होने के बाद इन्फेक्शन और बीमारियों से लड़ने की हमारे शरीर की क्षमता कम होने लगती है। नतीजा यह होता है कि आए दिन शरीर में तमाम तरह के इन्फेक्शन होने लगते हैं। एचआईवी इन्फेक्शन की यह लास्ट स्टेज है और इसी स्टेज को एड्स कहा जाता है।


ऐसे फैल सकता है -


• एचआईवी पॉजिटिव पुरुष या महिला के साथ अनसेफ (कॉन्डम यूज किए बिना) सेक्स से, चाहे सेक्स होमोसेक्सुअल ही क्यों न हो।


• संक्रमित (इन्फेक्टेड) खून चढ़ाने से।


• एचआईवी पॉजिटिव महिला से पैदा हुए बच्चे में। बच्चा होने के बाद एचआईवी ग्रस्त मां के दूध पिलाने से भी इन्फेक्शन फैल सकता है।


• खून का सैंपल लेने या खून चढ़ाने में डिस्पोजेबल सिरिंज (सिर्फ एक ही बार इस्तेमाल में आने वाली सुई) न यूज करने से या फिर स्टर्लाइज किए बिना निडल और सिरिंज का यूज करने से।


• हेयर ड्रेसर (नाई) के यहां बिना स्टर्लाइज्ड (रोगाणु-मुक्त) उस्तरा, पुराना इन्फेक्टेड ब्लेड यूज करने से।


• सलून में इन्फेक्टेड व्यक्ति की शेव में यूज किए ब्लेड से। सलून में हमेशा नया ब्लेड यूज हो रहा है, यह इंशुअर करें।



ऐसे नहीं फैलता -


• चूमने से। लेकिन अगर किसी व्यक्ति को एड्स है और उसके मुंह में कट या मसूड़े में सूजन जैसी समस्या है, तो इस तरह के व्यक्ति को चूमने से भी एड्स फैल सकता है। यानी एड्स का संक्रमण चूमने पर भी फैल सकता है, अगर सावधानी न बरती जाए।


• हाथ मिलाना, गले मिलना, एक ही टॉयलेट को यूज करना, एक ही गिलास में पानी पीना, छीकने, खांसने से इन्फेक्शन नहीं फैलता।


• एचआईवी शरीर के बाहर ज्यादा देर तक नहीं रह सकता, इसलिए यह खाने और हवा से भी नहीं फैलता।


• रक्तदान करने से बशर्ते खून निकालने में डिस्पोजेबल (इस्तेमाल के बाद फेंक दी जाने वाली) सुई का इस्तेमाल किया गया हो।


• मच्छर काटने से।


• टैटू बनवाने से, बशर्ते इस्तेमाल किए जा रहे औजार स्टर्लाइज्ड हों।


• डॉक्टर या डेंटिस्ट के पास इलाज कराने से। ये लोग भी आमतौर पर स्टरलाइज्ड औजारों का ही इस्तेमाल करते हैं।



इनके जरिए पहुंचता है वायरस –


• ब्लड


• सीमेन (वीर्य)


• वैजाइनल फ्लूइड (स्त्रियों के जननांग से निकलने वाला दव)


• ब्रेस्ट मिल्क


• शरीर का कोई भी दूसरा फ्लूइड, जिसमें ब्लड हो मसलन, बलगम


• इनसे भी फैल सकता है एड्स (इनके संपर्क में अक्सर मेडिकल पेशे से जुड़े लोग ही आते हैं)


• दिमाग और स्पाइनल कॉर्ड के इर्द-गिर्द रहने वाला दव


• हड्डी के जोड़ों के आसपास का दव


• भ्रूण के आसपास का दव



ये लक्षण हैं तो शक करें –


एचआईवी से ग्रस्त इंसान शुरू में बिल्कुल नॉर्मल और सेहतमंद लगता है। कुछ साल बाद ही इसके लक्षण सामने आते हैं। अगर किसी को नीचे दिए गए लक्षण हैं, तो उसे एचआईवी का टेस्ट कराना चाहिए :


• एक महीने से ज्यादा समय तक बुखार बने रहना, जिसकी कोई खास वजह भी पता न चले।


• बिना किसी वजह के लगातार डायरिया बने रहना।


• लगातार सूखी खांसी।


• मुंह में सफेद छाले जैसे निशान होना।


• बिना किसी वजह के लगातार थकान बने रहना और तेजी से वजन गिरना।


• याददाश्त में कमी, डिप्रेशन आदि।


(नोट : ये सभी लक्षण किसी साधारण बीमारी में भी हो सकते हैं। )




एचआईवी के लिए मेडिकल टेस्ट –


किसी को एचआईवी इन्फेक्शन है या नहीं, यह पता करने का अकेला तरीका यही है कि उस इंसान का ब्लड टेस्ट किया जाए। लक्षणों के आधार पर शक किया जा सकता है, लेकिन यह पक्के तौर पर नहीं कह सकते कि एचआईवी है या नहीं, क्योंकि एचआईवी के लक्षण किसी दूसरी बीमारी के लक्षण भी हो सकते हैं। कई मामलों में ऐसा भी होता है कि एचआईवी पॉजिटिव होने के बाद कई साल तक कोई लक्षण सामने नहीं आता।


एचआईवी टेस्ट और काउंसलिंग के लिए सरकार ने पूरे देश में 5 हजार इंटिग्रेटेड काउंसलिंग एंड टेस्टिंग सेंटर (आईसीटीसी) बनाए हैं। इन सेंटरों पर व्यक्ति की काउंसलिंग और उसके बाद बाजू से खून लेकर जांच की जाती है। यह जांच फ्री होती है और रिपोर्ट आधे घंटे में मिल जाती है। आमतौर पर सभी जिला अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और कुछ कम्यूनिटी हेल्थ सेंटरों पर यह सुविधा उपलब्ध है। यहां पूरी जांच के दौरान व्यक्ति की आइडेंटिटी गुप्त रखी जाती है। पहले रैपिड या स्पॉट टेस्ट होता है, लेकिन इस टेस्ट में कई मामलों में गलत रिपोर्ट भी पाई गई हैं। इसलिए स्पॉट टेस्ट में पॉजिटिव आने के बाद व्यक्ति का एलाइजा टेस्ट किया जाता है। एलाइजा टेस्ट में कन्फर्म होने के बाद व्यक्ति को एचआईवी पॉजिटिव होने की रिपोर्ट दे दी जाती है।


एचआईवी कन्फर्म हो जाने के बाद मरीज को इलाज के लिए एआरटी सेंटर पर भेजा जाता है। पूरे देश में ऐसे करीब 280 एआरटी सेंटर हैं। इन सेंटरों पर इलाज शुरू करने से पहले व्यक्ति का एक और ब्लड टेस्ट किया जाता है, जिसमें उसकी सीडी-4 सेल्स की संख्या का पता लगाया जाता है। अगर यह संख्या 250 से कम है तो व्यक्ति का फौरन इलाज शुरू कर दिया जाता है और अगर उससे ज्यादा है तो डॉक्टर उसे कुछ दिन बाद आने की सलाह दे सकते हैं। इन सेंटरों पर भी काउंसिलर भी होते हैं, जो इलाज के साथ-साथ व्यक्ति की काउंसलिंग भी करते हैं। इलाज फ्री होता है और व्यक्ति की पहचान गुप्त रखी जाती है।


ज्यादातर मामलों में एचआईवी इन्फेक्शन हो जाने के दो हफ्ते के बाद टेस्ट कराने पर ही टेस्ट में इन्फेक्शन आ पाता है, उससे पहले नहीं। कई बार इसमें छह महीने भी लग जाते हैं। ऐसे में अगर किसी को लगता है कि उसका कहीं एचआईवी के प्रति एक्सपोजर हुआ है और फौरन टेस्ट कराता है, तो टेस्ट का रिजल्ट नेगटिव भी आ सकता है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि उस व्यक्ति को इन्फेक्शन नहीं हो सकता। ध्यान रखें कि एचआईवी को शरीर में एक्टिव होने में छह महीने तक लग सकते हैं। इसलिए छह महीने बाद एक बार फिर टेस्ट कराना चाहिए। छह महीने बाद भी अगर नेगेटिव आता है तो आप खुद को सेफ मान सकते हैं। शरीर में वायरस की एंट्री से लेकर उसके एक्टिव होने तक के समय को विंडो पीरियड कहा जाता है। इस पीरियड में एचआईवी का टेस्ट से भी पता भले ही न चलता हो, लेकिन जिसके शरीर में वायरस है वह इसे दूसरे को ट्रांसफर जरूर कर सकता है।



एड्स का इलाज -


एड्स अब लाइलाज नहीं -




उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में एक चिकित्सक ने अपने कठिन परिश्रम व लगन से एड्स जैसे लाइलाज बीमारी की आयुर्वेदिक दवा बनायी है जिसका भारत सरकार ने पेटेन्ट कर लिया है।


कुशीनगर के लक्ष्मीगंज के पास वगहा खुर्द निवासी डॉ. संतोष कुमार ने आटोमोवाइल से इंजीनियरिंग करने के बाद आयुर्वेदाचार्य की डिग्री ली और कड़ी मेहनत व लगन से एड्स जैसी लाइलाज बीमारी के लिए लक्ष्मीगंज में अपना अनुसंधान करके विशुद्ध रूप से हानि रहित हर्बल दवा बनायी जिसमें 16 माह में एड्स से निर्मूल रूप से मुक्ति मिल सकती है।


डॉ. पाण्डेय ने पत्रकारों को बताया कि इस दवा के पेटेन्ट के लिए नई दिल्ली स्थित भारत सरकार की पेटेन्ट कार्यालय में छह वर्ष पूर्व आवेदन किया गया था जिसको गहन जांच के बाद 19 जुलाई 2010 को बीस वर्षों के लिए पेटेन्ट कर दिया गया है। इस दवा से एचआई पॉजीटिव रोगी बिलकुल मुक्त हो जाएंगे।


Presented by- Ravi Srivastava.
(मेरी पत्रिका और टोटल हेल्थ केयर में एक साथ प्रकाशित)
With Thanks to Josh18.com
http://josh18.in.com/showstory.php?id=720302
& to Navbharattimes.com
http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/5279871.cms